Sunday, October 17, 2010

"किसे वोट दे" बिहार चुनाव

बिहार में चुनावी जंग छिड़ी है सभी पार्टियाँ अपने-अपने तरीके से चुनावी प्रचार शुरू कर दिए है. सभी पार्टियों के दिग्गज नेता कमर कस कर चुनावी मैदान में उतार चुके है और अपने-अपने तरीके से जनता को प्रभावित या गुमराह करने लगे है। इलेक्ट्रोनिक मिडिया वाले भी चुनावी प्रचार कि कवरेज ज्यादा से ज्यादा दिखाने कि कोशिश कर रहे है तथा "अगला मुख्य-मंत्री कौन" का सर्वे भी शुरू कर दियें है। एक मीडिया हाउस द्वरा कराये गये सर्वेक्षण में मुख्यमंत्री पद के अन्य दावेदारों में राजद नेता लालू यादव को मात्र १७ फीसद, लोजपा नेता रामविलास पासवान को फीसद, राबड़ी देवी को फीसद और भाजपा नेता सुशील मोदी को फीसद लोगों ने स्वीकार है ।जबकि नीतीश कुमार ६६ फीसदी लोगों की पहली पसंद हैं | ’सहारा न्यूज नेटवर्कके इस सर्वेक्षण में राज्य के तकरीबन सभी विधानसभा क्षेत्रों को शामिल किया गया था.
कांग्रेस पार्टी के महा-सचिव राहुल गाँधी, प्रधान-मंत्री मनमोहन सिंह तथा कांग्रेस अध्यक्छ श्री मति सोनिया गाँधी ने बिहार में विकाश का श्रेय केंद्र द्वारा अधिक पैसा दिया जाना बताते है। यह अच्छी बात है कि केंद्र ने बिहार को ज्यादा पैसा दिया जो बिहार के विकाश के कार्य में लगा, तो फिर पिछले चालीस वर्षों तक बिहार कि सत्ता कांगेस के हाथो में थी तब बिहार में विकाश क्यों नहीं नज़र आया ? मतलब साफ है कि कांग्रेस पार्टी के किसी भी मुख्य-मंत्री में बिहार के विकाश को लेकर कोई सपना या इच्छाशक्ति नहीं थी या फिर उनको कार्य करने कि शैली नहीं आती थी जिसके चलते बिहार का विकाश नहीं हो पाया....... तो फिर हम कांग्रेस को वोट क्यों दे ? यह सभी को मालूम है कि केंद्र में जिसकी सरकार है उसी कि सरकार अगर राज्य में है तो उस राज्य को वितीय सहायता ज्यादा मिलाती है अगर किसी राज्य में दुसरे पार्टी कि सरकार है तो उसके हक के बराबर ही वितीय सहायता मिलाती है उससे ज्यादा नहीं ? तो फिर यह कांग्रेस बार-बार क्यों कहती है कि बिहार को केंद्र द्वारा वितीय सहायता ज्यादा दिया गया है ? जब कि केंद्र में कांग्रेस कि सरकार है और बिहार में NDA की सरकार है।
पिछले पंद्रह साल तक राष्ट्रिय जनता पार्टी [RJD] कि सरकार बिहार में थी उस समय-अवधी में भी बिहार में कोई विकाश नहीं हुआ, बल्कि वह पंद्रह साल बिहार के काले अध्याय के सामान था उसी समय-काल में बिहार से बिहारियों का पलायन सबसे ज्यादा हुआ था , यहाँ के बच्चे उच्च शिझा के लिए दुसरे राज्यों में पढने के लिए गए, बिहार कि बदनामी पुरे देश में हुई, असमाजिक तत्वों का बोल-बाला इसी समय अवधि में हुआ, शिझा के स्तर में गिरावट सबसे ज्यादा इसी समय काल में हुआ, बिहार कि सड़कों का बुरा हाल, ला एंड आडर के स्तर में गिरावट इसी समय अवधि में हुआ है। आज राष्ट्रिय जनता पार्टी के नेता चुनावी प्रचार में विकाश कि बाते करते है तो आप पिछले पंद्रह साल तक जब सत्ता में थे तो थोडा भी बिहार का विकाश क्यों नहीं किये ? अब आप पर कैसे यकीन किया जाय कि बिहार कि सत्ता अगर आपके हाथ में आएगी तो आप बिहार का विकाश करेंगे ? हम अपना बहुमूल्य वोट आपको क्यों दे ?
श्री राम विलाश पासवान ...... ये केवल बिहार से चुनाव जीतते है, बिहार के लिए नहीं जीते है, अगर बिहार के लिए जीते तो शायद MP का चुनाव जरुर जीतते। श्री पासवान ने अभी तक निरीह और गरीब जनता के वोट से केंद्र में केवल सत्ता के सुख का उपभोग किया है। अब सत्ता से हटने बाद इनको जनता याद आने लगी है। इन्हों ने परिवार वाद को सबसे ज्यादा बढ़ावा दिया है। ये अपने चुनाव प्रचार में ५०,०००/- पच्चास हजार रुपया गरीबो को देने कि बात कहते है जिसका कोई सूद नहीं लगेगा , क्या वाणिज्य बैंक ऐसा करेगी ? क्या केंद्र सरकार या राज्य सरकार का ऐसा कोई सर्कुलर है जो बिना सूद लिए ही या बिना गिरवी रखे बैंक पैसा बाँट दे साथ ही आधा डिसमिल जमीन गरीबो को देने कि बात करते है समझ में नहीं आती है कि ये आधा डिसमिल जमीन काहा से देंगे। शायद यह गुमराह करने वाला भाषण है । हम अपना वोट इनको क्यों दे, जो कि केवल अपने लिए जीते है ?
नितीश कुमार वर्तमान में बिहार के मुख्य-मंत्री....... पिछले पांच साल से बिहार के मुख्य-मंत्री है तथा पिछले पांच सालो में अपने सरकार द्वारा किये हुए कार्यो का मजदूरी बिहार कि जनता से मांग रहे है ताकि अगले पांच साल के लिए फिर इनकी सरकार बन सके।
नितीश कुमार जब पांच साल पहले बिहार के मुख्य-मंत्री बने तो उस समय बिहार बदहाली के आलम से गुजर रहा था, ला एंड ऑडर नाम कि कोई चीज ही नहीं थी, शिच्छा के स्तर में बहुत ज्यादा गिरावट आ गया था, बिहार के सडको कि हालत खस्ता-हाल थी उद्योग धंधे बंद पड़े हुए थे बहुत हद तक बड़े व्यापारी-वर्ग, बड़े किसान एवं मजदूरों का पलायन बिहार से हो चूका था। असमाजिक तत्वों का बोल-बाला था , वैसे समय में नितीश कुमार मुख्य-मंत्री बने और इस बदहाल बिहार को फिर से सँवारने कि चुनौती को स्वीकार किया। इन पांच सालों में आज बिहार कि सड़के अच्छी हालत में है, अब गाँव के कोई बीमार व्यक्ति को शहर के हस्पताल में आने के लिए कंधो कि जरुरत नहीं पड़ती है क्यों कि सड़के होने से अब गाँव में ही गाड़ियाँ मिल जाती है, अब किसान अपने अनाज को शहरो में लाकर ऊँचे दामो में बेच रहे है क्यों कि अब किसानो को बिचौलिए कि जरुरत नहीं है। यातायात का साधन बढ़ा है, जो रास्ते पहले चार घंटे में पुरे होते थे अब सड़कें होने से एक घंटे में पुरे हो जाते है। ला एंड ऑडर बहुत हद तक दुरुस्त है पिछले पांच सालों में करीब ४९ हजार अपराधियों को न्यायलय द्वारा शज़ा सुनाई गई हैअब कही जाने पर डर नहीं लगता है। अब देर रात तक सडको पर लोग नज़र आते है। स्कूलों में लड़के एवं लड़कियों कि संख्या में इजाफा हुआ है अब गाँव के स्कूलों में भी बच्चे नज़र आने लगे है, यह सायकिल और स्कूल यूनिफार्म का नतीजा है जो नितीश कुमार ने चलाई थी अब उसके परिणाम नज़र आने लगे है। अब सरकारी हस्पतालों में डाक्टर भी बैठते है मरीज भी नज़र आते है तथा दवाईयाँ भी मिलती है। कुछ नए कालेज खुले है कुछ खुलने के कगार पर है। बहुत हद तक जो बिहार का नाम धूमिल हुआ था अब धीरे-धीरे साफ़ होने लगा है तथा दुसरे राज्यों में बिहारी कहने में अब शर्म नहीं आती है। हाँ इन पांच सालों में बिहार कि तस्वीर बदली है। नितीश कुमार पहले बिहार के मुख्य-मंत्री है जो बिहार के हित के बारे में शोंचे है इसके पहले कोई मुख्य-मंत्री बिहार के हित के बारे में नहीं सोंचा है।
अब हम खुद आकलन कर ले कि हम किसे वोट दे ? फिर से बदहाल बिहार बनाना है तो उसके लिए कांग्रेस पार्टी है राष्ट्रिय जनता दल है तथा लो.ज.पा है। अगर खुशहाल बिहार बनाना है तो भारतीय जनता पार्टी तथा जनता दल यू है।

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