Wednesday, October 27, 2010

मतगणना बाद बिहार कि किस्मत का फैसला

मतगणना के बाद बिहार कि किस्मत का फैसला आने वाला चुनाव परिणाम तय करेगा। क्यों कि बिहार में दो ही पार्टियों के बीच सीधा संघर्ष है।
- एन डी जिसमे जनता दल यु और बीजेपी का गटबंधन है।
- आरजेडी और लोजपा का गटबंधन है।
कांग्रेस पार्टी तीसरे स्थान पर रहेगी और वह बिहार में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएगी।
बिहार विधान सभा चुनाव २०१० विकाश बनाम जातिवाद का सीधा संघर्ष है। चुनाव परिणाम आने के बाद ही यह तय होगा कि बिहार में विकाश कि जीत हुई या जातिवाद कि।
अगर विकाश कि जीत होती है तो एन डी ए कि सरकार फिर से सत्ता में आएगी और पिछले पांच सालो में जो विकाश कार्य हुए है वह और आगे बढेगा तथा बाहरी उद्योगपतियों का आने का रास्ता प्रसस्त होगा। तब अगले पाँच साल में बिजली कि समस्या, रोजगार कि समस्या, विद्यालय एवं महाविद्यालय कि समस्या, सरकारी हस्पतालों कि समस्या, गाँव-गाँव तक सड़के पहुँचाने कि समस्या, ला एंड ऑडर और दुरुस्त करने कि समस्या तथा आवागमन के रास्ते को और सुचारू गति प्रदान करने कि समस्या से बिहार को पूरी तरह से न भी सही लेकिन निजाद मिलेगी।

अगर आरजेडी और लोजपा कि सरकार बनती है तो जातिवाद कि जीत होगी। शुरू के दौर में सब कुछ ढहर सा जायेगा और लोग सरकार कि नीतियों का आकलन करेंगे, शायद इस आकलन में डेढ़ या दो साल का समय लग जाये। अगर सरकार कि नीतियाँ जनता के प्रति, राज्य के प्रति, विकाश के प्रति माकूल रहा तो फिर जनता लालू प्रसाद और रामविलास पासवान के प्रति अपने विश्वास को बना पायेगी। अगर लालू प्रसाद और रामविलास पासवान जनता को जो उम्मीदे दिए है उस पर सही नहीं उतरते है तो यह लालू प्रसाद और रामविलास पासवान के लिए आंखरी चुनाव साबित होगा। पिछले पंद्रह साल तक आरजेडी कि सरकार बिहार कि सत्ता में रही है लेकिन बिहार को कोई दिशा नहीं दे पाई थी बल्कि इनके शासन-काल में बिहार कि दशा और ख़राब हुई। इस चुनाव में अगर लालू प्रसाद और रामविलास पासवान कि पार्टी बिहार कि सत्ता में आती है तो शायद अपने पिछले गलतियों से सबक लेते हुए आगे विकाश के कार्यों पर ध्यान देंगे तथा बिहार को एक सही दिशा देंगे।
आज़ादी के बाद से बिहार कि सत्ता चालीस वर्षो तक कांग्रेस के हाथ में रही लेकिन विकाश के नाम पर बिहार बाटम लाइन पर रहा और बिहार में जो विकाश होना चाहिए वह नहीं हुआ। कांग्रेस के शासन से त्रस्त होकर यहाँ कि जनता श्री लालू प्रसाद के पक्छ में अपना जनादेश दिया। लालू प्रसाद पंद्रह साल तक बिहार कि सत्ता में रहे लेकिन इन्हों ने भी बिहार के विकाश पर कोई ध्यान नहीं दिया, बल्कि इनके शासन काल में बिहार कि स्थिति और ख़राब हुई। लालू प्रसाद के शासन से त्रस्त होकर बिहार कि जनता एनडीए (जनता दल यु + बीजेपी) को अपना जनादेश दिया। बिहार में एनडीए कि सरकार सत्ता में आई और मुख्यमंत्री श्री नितीश कुमार बने। सत्ता में आने के साथ ही इन्हों ने बिहार के ला एंड ऑडर को दुरुस्त किया, कानून का राज कायम होने से यहाँ के वाशियों को सकून मिला। फिर उन्हों ने पूरी तरह बर्बाद हो गई बिहार कि सड़कों पर ध्यान दिया, सड़कें बहुत हद तक अच्छी हुई तथा कुछ नई सड़कें भी बनी। जजर हालत में पहुँच चुकी सरकारी हस्पतालों को बहुत हद तक ठीक किया तथा डाक्टरों कि उपस्थिति अनिवार्य हुई जिससे मरीजों कि तायदात में वृद्धि हुई साथ ही मुफ्त कि दवाएं भी मिलने लगी। बिहार के स्कूलों में लड़के लड़कियों कि संख्या में कुछ ज्यादा ही वृद्धि हुई क्यों कि सरकार के तरफ से मुफ्त में साईकिल एवं स्कुल यूनिफार्म बांटे गए।

सरकार किसी कि भी बने बिहार कि समस्याओं से उसे रु-बरु होना पड़ेगा और उसके लिए पहल करनी पड़ेगी :- ला-एंड- आडर का और दुरुस्त होना, विद्यालय, महाविद्यालय को बहुतायात में खोलना पड़ेगा ताकि बिहारी बच्चे उच्च शिक्झा के लिए दुसरे राज्यों में न जाएँ। बिजली कि समस्या से बिहार को उबारना पड़ेगा ताकि कल-कारखाने खुल सके और लोंगो को रोजगार मुहैया हो सके। कृषि को उद्योग का दर्जा देना पड़ेगा जिससे किसान संपन्न हो सके और मजदूरों का पलायन रुक सके। सड़कें गाँव-गाँव तक बनानी पड़ेगी ताकि लोंगों का आवा-गमन सुचारू रूप से हो सके। उत्तर बिहार में हर साल जो बाढ़ के रूप में कहर आता है और गाँव का गाँव उस बाढ़ में बह जाता है उस बाढ़ के पानी को रोकने के लिए डैम बनवाने पड़ेंगे जिससे पन-बिजली का उत्पादन भी होगा और बाढ़ का पानी खेंतो में सिचाई के काम भी आएगा। गाँव-गाँव तक सरकारी हस्पताल खोलने होंगे ताकि गाँव का कोई भी व्यक्ति बिना इलाज के न मर सके।
बिहार में जब रोजगार मिलने लगेगा तो लोंगो का पलायन अपने-आप रुक जायेगा, हर माह जो करोडो रुपये दुसरे राज्यों को चले जाते है उच्च शिझा के नाम पर वह पैसा बिहार में ही रहेगा, बिहार में सम्पन्नता आएगी, बिहार आत्म निर्भर बनेगा, मावोवाद भी धीरे-धीरे ख़त्म हो जायेगा तथा मावोवादी भी आम लोगों कि तरह जिंदगी बसर करने लगेंगे। यह सब संभव है बसरते कि इस राज्य के बनने वाले मुखिया इन बातो पर अमल करें।

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